First Night फर्स्ट नाईट


‘न  तुम शरमाई, न घबराई और न ही चीखी । अनुभवी हो क्या ?’ उसकी अनावृत देह से अलग होने के बाद थोड़ी देर सुस्ताकर उसने अपनी नई नवेली दुल्हन से हल्के अंदाज में मजाक करते हुए पूछा ।

‘हां ।’ बिना किसी झिझक के सच्चाई स्वीकार करते हुए उसने जवाब दिया ।

‘तुम्हारे कहने का मतलब क्या है ?’ अपनी आशा के विपरीत उसका जवाब पाकर वह चौंक कर बैठ गया ।

‘तुम में भी तो मुझे वह झिझक, उतावलापन और हताशा नहीं दिखाई दी जो फर्स्ट नाईट को एक वर्जिन पुरुष में होनी चाहिए । एक शातिर खिलाड़ी की भांति तुम सब कुछ बड़े आराम से कर गए ।’ उसकी तरह ही अनुभवी उसकी पत्नी ने सच्चाई भांपते हुए उस पर आक्षेप किया ।

शादी से पहले किसी और के संग कई रंगीन रातें बिताने के बावजूद पत्नी के रूप में सतीत्व की प्रतिकृति पाने की उसकी चाहत रात के अन्धेरें में कहीं खो गई । फर्स्ट नाईट को अपने सेकेण्ड हेंड अनुभव के साथ वे दोनों चुपचाप करवट बदल कर सो गए ।

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